उम्र बीते जा रही है और
वो कहते हैं अभी वक़्त है
वक़्त है ,वक़्त है कहते कहते
वक़्त भी अपनी रफ़्तार पकड़ ली है
अहद - ए- शवाब भी फिसलती जा र� read more >>
आज, कहे तों क्या .....
आज कहे तो ....? हो, आज...
ऐसे गिरी आसमाँ से
नूर सी बिजली ,हाय गई चीर कल्लेजा ।
तड़ती रात रंगीली ।हाय
आज ,कहे......
नजर मे सदा read more >>
(गजल छंद01)
चलते चलते बोझिल होने पर ठहराव ही है जरूरी,
रहते रहते एक ही छत के नीचे बदलाव ही है जरूरी।
संसार में गम बहुत हैं इसलिए प्यार नि� read more >>
(मुक्तक छंद)
01
जिन्दगी को मैंने इस कदर देखा जिन्दगी मुझ में डूब गई।
मेरी हर चाहत को पूरा करने के लिए मजबूर हो गई।
अब आलम यह है कि सारी दु� read more >>