सांझ ढले ,तो घर आना तुम,
कई उम्मीदों को, फ़िर लाना तुम।
छुट रहे ,उन रिस्तो की डोर को,
फ़िर मजबूती से, बंध जाना तुम।
साँझ ढले तो ,घर आना त� read more >>
ये बारिश का मौसम भी क्या रंग लाया
कहीं खुशियों का मंजर तो कहीं गम का साया,
कहीं कोयल की कू कू कहीं सावन की मस्ती, कहीं पानी में डूबी गरीब� read more >>