तु जा रही हो छोडकर गैरो के लिए
हमने तो विश्वास किया दिलो जान से ज्यादा
आज भी तेरे याद को हम समेटे बैठे है
गम की चादर हम ओढ के बैठे है !
क� read more >>
मेरे बचपन का गांव
दिनांक 23/11/2023
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आज कई वर्षों के बाद मुझे अपनी मायके के गांव जाने का अवसर मिला।
जहां मेरा बचपन बीता था
कुछ समय पश्चा read more >>
मैं अधूरे सफर का मुसाफिर हु, मंजिल तक हमे जाना है
थक गए है चलते चलते पैर मेरे, इन पैरो का ये बहाना है
कुछ करने का ठान लिया है मैने हमे कुछ read more >>