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बगुला और केकड़ा
बगुला और केकडा एक वन प्रदेश में एक बहुत बडा तालाब था। हर प्रकार के जीवों के लिए उसमें भोजन सामग्री होने के कारण वहां नाना प्रकार के ज�
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सावित्री बाई फुले- नारी मुक्ति आंदोलन की प्रणेता
सावित्री बाई फुले - नारी मुक्ति आंदोलन की प्रणेता, देश की पहली महिला शिक्षिका की जयंती है, जानें उनके संघर्ष की कहानी सावित्रीबाई फुल
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विराज रहै है अवध बिहारी
सब ग्रह नक्षत्र मिल , योग बनावत है। शुभ , पगु धार रहे ,प्रभु रघुनाथ जी शुभ । है तारारण हार प्रभु , जय श्री राम प्रभु तार दियो प्र�
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नूतन साल खुशियां भरे
नूतन साल खुशियां भरे,लाए मधुर बहार। जीवन सुरभित खूब हो, दिल में हो अति प्यार।। दिल में हो अति प्यार,चाह पूरी हो सबका। सबमें झलके जोश,क�
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अच्छा करना सोच है-मन में है तूफान
अच्छा करना सोच है,मन में है तूफान। विपदा का कर सामना,फलप्रद किया जुबान।। मन में है तूफान रब, दे दे दृढ़ वरदान। खुशियां भरूं समाज में, �
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जब तक मुझ में सांस है
जब तक, मुझमें सांस है, मुझे ये विश्वास है। मैं सफल जरूर, हो जाऊंगी, गर मेहनत करती, जाऊंगी। कुछ मिले न मिले अगर, एक सुकून तो अवश्य मिलेगा,
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स्पर्धा का दौर है-मन को रखें बुलंद
स्पर्धा का दौर है,मन को रखें बुलंद। रखिए ऊंच विचार को, हों शीतल सम चंद।। स्पर्धा का दौर है, रखें साथ उत्साह। कम हों कभी न चाह नव,लगे सु�
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सुख दुख हैं मेहमान जी
सुख दुख हैं मेहमान जी,स्वागत करना काम। दो ही पहलू सत्य है,कभी सुबह तो शाम।। सुख दुख हैं मेहमान जी, सही सिखाते मर्म। सुख में भी प्रभु मै
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जलने लगे अलाव अब ठंढ़ी चारों और
जलने लगे अलाव अब,ठंढ़ी चारों और। थड़थड़ हैं तन कांपते, नहीं बंधते कौर।। जलने लगे अलाव अब,अमृत तुल्य है आग। बिना आग के जल नहीं,गाते सब य
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उम्र के आखिरी पड़ाव
"आखिरी पड़ाव" "एक उम्र निकलने वाली है,और एक उम्र जो बची हुई है,उसमें जीने की तमन्ना अभी-भी बाकी है तुम्हारे साथ,मिलोगी क्या,उम्र के आखिरी
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मोहब्बत् के अल्फ़ाज
"साया" "मैंने बहुत कोशिश की,मेरी कलम से निकला हुआ अल्फ़ाज मोहब्बत् के बारे में तक़रीर न करे,मगर उनकी यादों का साया इस कदर है कि,न चाह के भी
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पाकिजा आई जहन्नुम के बाजार में
इक नन्ही परी बादल जिसका आशियाना हुआ करता था आफताब सी चमक माहताब नजराना हुआ़ करता था हर दर्द गम से बेफिकर मस्त मौला मुस्कुराना हुआ़ �
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