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जिसने तुझे पुजा है। तेरे इस मन्दिर मे वही बैठा है। आज तेरी चोखट पे , रूठी किस्मत, हाय , रुठी अम्बे माँ कर्म से कुछ � read more >>
एक बार तूझे मन्दिर मे आना होगा । बनी रहे ,आस्था मेरी, मन मे विश्वास जगाना होगा। । मेरी टुटती ऊमीदो का तु किनारा तो बन देख रहा हूँ तेर� read more >>
हर तकलीफ को हंस के सहले जो, तेरी खुशियों में खुश हो जाए. सॉरी दुनिया की खुशियां दे, शौक तेरे जो पूरे कर जाए. पैर तेरे जब डगमगाए, तुझे सही � read more >>
पागल है जिंदगी और मस्ताना ख्वाहिशात हम तो मुसाफिर है अपने मंजिल के डगर की क्या बात रुकना नहीं है बस चलना है कंकड़ हो या फूल सबसे म� read more >>
कविता आगाज ए सरहिंद धीर हू,अधीर हूं, पीर हूं,शांति का मीर हूं, आन हूं,भान हूं,शान हूं,हिंद की कमान हूं ना शोर हूं,ना अघोर हूं,मै� read more >>
प्रेम ( पति - पत्नी का )  एक साहूकार जी थे उनके घर में एक गरीब आदमी काम करता था । जिसका नाम था । मोहन लाल जैसे ही मोहन लाल के फ़ोन की घंटी बजी read more >>
किस किस से जाकर कहती ख़ामोशी का राज, अपने अंदर ही ढूंढ रही हूँ अपनी ही आवाज। -दिनेश कुमार कीर read more >>
चाहतें भी नफ़रतें भी क्या ये झमेला है। ज़िन्दगी बस चार दिन का ही तो मेला है।। मुश्किलों में साथ देता कौन अब किसके। हर कदम पर शख़्स वो ख़ुद � read more >>
आशा आँसू पोंछती,देती है उत्साह। निर्बल को करती सबल, करे सरल नित राह।। आशा आँसू पोंछती,भरती साहस खास। नव्य भाव को यह जगा, सदा बुझाती प्� read more >>
Ek aisa samay, jo jeevan me khamoshi Lata h,apne bacchon ki parbaris me ma bap apna sab kuch kurban kar dete h, khud ke liye jeena bhul jate h, bacchon ki khushiyon me khush hote h or unke gum me duhki, Aj jab bacche bde ho gye,to chidiya ke bacchon ke bacchon ki tarah asman me ud gye, Or humne jindagi jaha se suru ki thi bahi par pahuch gye, Ja read more >>
यह मोहब्बत है ठगों की बस्ती, एक पल में बदल देती है हस्ती; आशिक़ रहते है इश्क़ में बैचेन, इश्क़ जाता है उजाड़ कर बस्ती...! read more >>
बजट एक नजर में.. आजादी के पहले भारत में पहला केंद्रीय बजट 7अप्रैल 1860 में ईस्ट इंडिया कंपनी के स्कॉटिश इकोनॉमिक्स और पॉलिटीशियन जेम्स व� read more >>
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