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क्रिसमस
क्रिसमस आया क्रिसमस आया, आकर के नई खुशियां लाया। बच्चे हैं उत्सुक इतने, अब मिलेंगे उपहार कितने। कागज में अपनी ख्वाहिश लिखकर, डाल मो�
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जन्मदिन
जिसका रहता है बेसब्री से इंतजार, वह है जन्मदिन का त्यौहार। यह होता वर्ष में एक बार, उसे दिन मिलता सभी का प्यार। जन्मदिन है खुशी का दिन
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बात चली है
गीतिका जाने कैसी बात चली है । सहमी-सहमी बाग़ कली है । जिन्दा होती तो आजाती, सायद बुलबुल आग जली है । दुख का सूरज पीढ़ा तोड़े, सुख की म�
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प्रश्नचिन्ह
कहानी प्रश्न चिह्न यदि आंखों को बादल और झर झर झरते आंसू को मुसलाधार बारिश तथा वक्त को आषाढ़ का दिन कहें तो कोई अतिशयोक्�
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बादल
बादल रूठ गये क्यों हो हमसे तुम? सूख गये क्यों हो जल से तुम? मुझे पता है क्यों रूठे हो? बूंद बूंद से क्यों सूखे हो? छोड़ो नादानी बच्�
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दिल्ली मेट्रो
चलो अपने रोज का सफ़र बताता हूं रोज मेट्रो के पथ से आता जाता हूं मेरे घर से ऑफिस काफी ज्यादा दूर हैं जहां से मैं बैठता हूं बस स्टेशन शा
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बचपन की कुछ यादें
यादें बचपन की चलो देखते हैं फिर एक समय पुराना, शिक्षालय के चारों यार, यारों का था याराना, हाथ में कपड़े के फटे हुए होते थे थैले, ख�
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प्रेम
पाजाऊँ जो प्यार दीप का विष का प्याला हँसकर पीलूँ सहरा में भी खुलकर जीलूँ पाजाऊँ जो प्यार दीप का अँधियारी काली रातों में । बना सहेली
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पक्षीयों का संदेश
वर्षों से तिनका-तिनका कर, बुनी थी जिसे मैं। पेड़ की डाली पर बैठ, गाया करती थी मैं। जब,सूर्य लालिमा बिखेरते आसमां में, चीं -चीं कर जगाया �
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विश्वास में घात
एक बीज वपन से, पौधे उगते दो। कभी सामने वो, तो कभी सामने वो। पता नहीं कब, कौनसा, भाग जाए दे खो। यमली उपज से, मनुज बना, है सामने जो। विश्�
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मंजरी एक प्रभात
जब तक सागर के आंचल में पानी का हो भार खुशियां डूबे ना दरिया पार, ईश्वर में कहूं क्या ऐसी बात मंजरी - एक प्रभात।। आशाओं से भरा अदभुत ज�
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न्याय
गुनाह कर सर उठाये बोलता है, गीता कि क़सम खाकर न्याय तौलता है। अपने गुनाहों में डाल पर्दा खड़ा हुआ है, शातिर सा औरों के राज खोलता है। नाग
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