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नौका पार लगाए कौन
नौका पार लगाए कौन प्रश्न पूछते प्रश्न खड़े हैं उत्तर साधे बैठे मौन । भँवरों के हैं नाविक सारे नौका पार लगाए कौन ? पाँव पसारे विषबे
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* वादा-खिलाफी *
#समसामयिक ** वादा-खिलाफी ** हाथ में, गंगा जल को लेकर, बंद करने का, वादा को कर, यह चीज खराब । सत्ता की सरकार दुकान में हो या हो घर पर, ब�
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बेटियां
बहुत खुश होता है ऊपरवाला तब गोद में आती हैं बेटियां युग कितने भी बदले आज भी लक्ष्मी ही कहलाती हैं बेटियां जिम्मेदारियां पड़े तो रि�
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आज
अब झूठे आरोपों से कोई सीता वनवास नहीं सहेगी भरी सभा में कोई द्रौपदी अब अपमान नहीं सहेगी कोई भी मेरा अब प्रेम में विषपान नहीं करेगी
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मिलने की खुशी
आंखों में हल्के हल्के आंसू थे अधरों पर मीठी मीठी मुस्कान देह में हल्की-हल्की सिमटन थी और रोम रोम में खुशी की फुहार यू जिंदगी को जीना
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हरपल
हरपल मुस्कुराते रहिए जीवन एक सुंदर नदियां है खुशियों की नाव चलाते रहिए मौसम का बदलाव तो प्रकृति है उतार चढ़ाव जीवन के निभाते रहिए
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शेर
बक्त और हालात से डर लगता है दिल के जज्बात से डर लगता हैं डर लगता है तेरे बिझड जाने से अब तो जिंदगी के हालत से डर लगता है
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gareeb tha fakeer tha kalandar tha bo
गरीब था फकीर था कलन्दर था वो जो भी था दिल का सिकंदर था वो न नदी था न पोखर था न दरिया था दूर तलक़ फैला हुआ समंदर था वो कहीं भी मुकाम मुकर�
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had se bekabu hota hua parinda
हद से बेकाबू होता हुआ परिंदा होशो हवास खोता हुआ परिंदा अब हर डाल पर मौजूद है बस बैबस उदास रोता हुआ परिंदा खुआबों की दुनिया से अचानक �
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एकलव्य
धनुष था मेरे बाणों का दर्पण चमत्कारी वैभव भुजाओं में निषाद पुत्र का अंश सवेरा चला था स्वर्ण बहारों में नादान अनजान बालक था मै वह�
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ब्रेकप शायरी
प्यार में फसा के ,यू पागल बनाने की कोशिश करती हो तुम मुझपे मरती हो या किसी और पर मरती हो, अगर प्यार नहीं है ,तुमको मुझसे तो सच्च बताने में
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दारू का पहाड़ा
दारू एकम दारू - महफिल हुई चालू दारू दुनी गिलास - मजा आएगा खास दारू तिया वाईन - टेस्ट एकदम फाइन दारू चौके बियर - डालो next गियर दार�
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