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हर्जाना
शीर्षक- हर्जाना रीता अपने पति के साथ एक गाँव में रहती हैं I उसका एक बेटा रंजन सरकारी सेवा में हैं I वह पटना में रहता हैं I उसकी बेटी की शा�
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संपत्ति
कहानी शीर्षक : संपत्ति राधा की सास घर में झाड़ू लगा रही थी। मन में बहुत सारे विचार चल रहे थे I एक जमाना था जब पति को परमेश्वर माना ज�
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नदी के किनारे बसा हुआ गांव
नदी किनारे बसा वह गाँव नदी के किनारे बसा वह छोटा-सा गाँव दूर से देखने पर किसी चित्र की तरह लगता था। सुबह होते ही नदी के पानी पर सूरज की स
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સંઘભાવ
સેવાના માર્ગે ચાલે, એવો સંઘનો ભાવ છે, રાષ્ટ્રહિતને પ્રથમ રાખે, એવો તેનો સ્વભાવ છે. શિસ્ત અને સંસ્કારથી જીવનને શણગારવાનું, એકતાના સૂ�
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आसमा
मुखजबानी थी कहानी मेरी , ऐसी थी नादानी मेरी ।।
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खुदा
खुदा ऐसा दिन आए उस दिन खुदा खुद लाए ।।
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सितम
सितम का इम्तिहान बहुत हुआ ऐसा ऐतबार फिर एक बार हमको हम सा हुआ
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कलयुग का अपराधी
कलयुग का अपराधी मैं अपने पापो का अघाती हूं, मैं सिर्फ तेरे सुख में तेरा साथी हूं, हा मैं जानवरो को काटके खता हु, मैं ही तो कलयुग का अपराध
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किसे फ़िक्र है?
[Intro – धीमी, गंभीर आवाज़] कितने सवाल दबे हैं, कितनी आवाज़ें थमी हैं… किसके हिस्से रोशनी है, किसके हिस्से कमी है? [Verse 1] सच बोलें तो दीवारें
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स्कूल की रसोइयां पर कविता
स्कूल की रसोइयां राह देखते हैं बच्चे जिनके आने की आस लगाए बैठे रहते भोजन बन जाने की, प्यार परोसा जाता तेरा हर थाली में फिर मिटती है �
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मां
खुदा रहम मेरी जान पर ऐसा करार कराए फिर मेरी मां पर।।
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"પોતાની દિશા"
સમયની ચાલને સમજીને ચાલવાની વાત છે, અંધકાર વચ્ચે દીપક બનીને ચાલવાની વાત છે. દરેક ચમકતી વસ્તુને સોનું માનશો નહીં, વિવેકની આંખે દુનિયા
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