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रागी को कहीं मंडिया, कहीं, फिंगर, कहीं बाजरा तो कहीं नचनी के नाम से जाना जाता है। इसमें पोषक-तत्वों की मात्रा अत्यधिक रहती है, इसलिए इसे � read more >>
वार और प्यार दोनों एक जैसे हैं, जरा सी चूक होते ही इंसान तबाह हो जाते हैं...... read more >>
नन्हें नन्हें पग लेकर आई हैं जग में बेटी , कहलाती हैं लक्ष्मी का रूप घर की शोभा हैं बढ़ाती, किलकारी से उसकी कलिया भी खिलखिलाती, नन्हीं � read more >>
हल्की फुल्की पतली सी एक दरार से ताकता रहता हूँ दुनियाँ को इस पार से दरिया बहाकर ले जाता है अपने साथ कट कर गिरती है जो मिट्टी किनार से read more >>
श्रद्धा सुमन गौरवान्वित होता अचल धरा हिल उठती है भारत माँ के पूतों को जब शहादत मिलती है। पथ पे बिखरे कंकर तब भावुक हो उठत� read more >>
देखो बच्चों जाड़ो का मौसम आया, ठण्डी-ठण्डी फुहार लाया, धुआं-धुआं सा कोहरा आया, ठण्ड से कंपकंपाते हैं लोग, पहनों बच्चों स्वेटर और सॉक्स read more >>
सर्दियों में ही धूप की जरूरत होती हैं, गर्मियों में तो लोग छाता लगा लेते, बस समय समय की कीमत होती हैं। read more >>
स्वाभिमान अहम् के रोग का निदान है !स्वाभिमान शब्द आत्मगौरव और आत्मसम्मान के लिए प्रयुक्त होता है। यह ऐसा शब्द है जो हमें जाग्रत करता read more >>
कागज और कलम एक दूसरे के जीवनसाथी हैं, जैसे कागज बिना कलम के अधूरा है, वैसे ही कलम बिन कागज के चलती ही नहीं. लेखक पंकज कुमार बुड़ाकोटी read more >>
रंगों की अपनी है एक अलग पहचान, करता नहीं कोई इन का अपमान, हर बात किस्सों में आती है इनकी याद, कभी-कभी तो यह बन जाते हैं हर किसी के भी विवा� read more >>
किसी से भी उम्मीद तब तक होती है जब तक हमें हर चीज पाने की लालसा रहती है, जिस दिन लालसा खत्म उस दिन से उम्मीदें भी खत्म. लेखक पंकज कुमार ब� read more >>
माँ और बेटी का रिश्ता चाहे कितना भी प्यारा हो, लेकिन एक बेटी माँ बनकर भी अपनी माँ का दर्द नहीं समझ सकती. लेखक पंकज कुमार बुड़ाकोटी read more >>
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