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बेरोज़गारी के हाथ
कविता-बेरोज़गारी के हाथ आदि अंत हो या अनन्त हो मिटी कहां है क्षुधा किसी की सायद इसी लिए ही ईश्वर कर खाने के लिए हाथ दी इन हाथों से मे�
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जो चाहता है
जो चाहता है मिरी जीस्त यूँ ही बर्बाद रहे ख़ुदा करे वो शख़्स सदा आबाद रहे जिसके लब से निकली है मिरे हक़ में बद्दुआ मिरी दुआ है तमाम उम्र
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छत्रपति शिवाजी महाराज की महानता
*✍🏻🕉️*🌷🌷🌷🌷 *छत्रपति शिवाजी महाराज की महानता..........* प्रस्तुतकर्ता-सपनों का सौदागर..करण सिंह 👇👇👇 शिवाजी महाराज के सामने जब किसी सुं�
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आज का समाज, भाग=2, मजबूर कलेक्टर
मजबूर कलेक्टर, लेखक = शशिकांत सिंह किसी जिले के एक गांव में प्रमुख सड़क के बगल में मंत्री जी के साले का मकान बना था जिसके चबूतरे रोड को �
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सारा संसार को
स्थिति और परिस्थिति समान सी है दुःख के अवधि आश्मान सा है अक्सर लोग सुख के कामना करते है पर कौन जानता सुख के आयु मुस्कान सा जब रात के च�
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मैं हम से
जब तक है दम में दम तू रहे गा मेरा सनम जब तक साँस बाकि है मेरे सीने में तब तक रीत निभाते निभाते प्रीत करना हम भूल गए तुझे सवारने के चक
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हमदम
असांभव् को संभव कर दे ये मेरे हमदम हमराज निराशा को आशा में बदल दे ये मेरे हुजूर मेरे सरकार रिश्तों में मीठास भर दे ये मेरे प्रीतम प्�
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और कुछ पल
बातों से मन भरता नहीं मुलाकात कभी होती नहीं रूठे रूठे से रहते है आज कल क्या कहु या न कहूँ उस से क्या क्या गुजरता है दिल पे बो मेरा ह�
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सखा
मैं क्या कहु किस से कहु क्यों कहु किस लिए कहु बो मुझे भूल गए सदा के लिए अब तो यादों में भी न रहे बात और जज्बातों में भी न रहे बो मुझे छ
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एक हसीना
उल्फत की वह शाम थीं, रंग भरी मिजाज थी। अपने _ आप में हुस्नों हिजाब थी, चांद को शर्माती, वह हसीना, आलीशान और बेमिसाल थीं। कदमों में इश्के
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सवाल पूछेंगे
अगर मुस्कुरा भर दूं, अगर गुनगुना भर दूं, लोग सवालें चार पूछेंगे, "बात क्या है"? ये दिन-रात पूछेंगे। मैं अगर लिख देता हूँ, बातें कई हस
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क्रिसमस
समय था एक, जब अकस्मात हुई थी, कुँवारी कन्या थी मरियम,जिनकी समाज मे जान पहचान हुई थी। यूसुफ़ थे उनके जीवनसाथी, जिनसे वह ब्याह रचायी थीं।
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