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मैं हम से
जब तक है दम में दम तू रहे गा मेरा सनम जब तक साँस बाकि है मेरे सीने में तब तक रीत निभाते निभाते प्रीत करना हम भूल गए तुझे सवारने के चक
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हमदम
असांभव् को संभव कर दे ये मेरे हमदम हमराज निराशा को आशा में बदल दे ये मेरे हुजूर मेरे सरकार रिश्तों में मीठास भर दे ये मेरे प्रीतम प्�
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और कुछ पल
बातों से मन भरता नहीं मुलाकात कभी होती नहीं रूठे रूठे से रहते है आज कल क्या कहु या न कहूँ उस से क्या क्या गुजरता है दिल पे बो मेरा ह�
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सखा
मैं क्या कहु किस से कहु क्यों कहु किस लिए कहु बो मुझे भूल गए सदा के लिए अब तो यादों में भी न रहे बात और जज्बातों में भी न रहे बो मुझे छ
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एक हसीना
उल्फत की वह शाम थीं, रंग भरी मिजाज थी। अपने _ आप में हुस्नों हिजाब थी, चांद को शर्माती, वह हसीना, आलीशान और बेमिसाल थीं। कदमों में इश्के
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सवाल पूछेंगे
अगर मुस्कुरा भर दूं, अगर गुनगुना भर दूं, लोग सवालें चार पूछेंगे, "बात क्या है"? ये दिन-रात पूछेंगे। मैं अगर लिख देता हूँ, बातें कई हस
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क्रिसमस
समय था एक, जब अकस्मात हुई थी, कुँवारी कन्या थी मरियम,जिनकी समाज मे जान पहचान हुई थी। यूसुफ़ थे उनके जीवनसाथी, जिनसे वह ब्याह रचायी थीं।
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दीवाली
दीवाली एक हर्सोल्लास त्योहार की परिभाषा है, दिए के लौ के साथ लाये खुशियों की वो आशा है। हर घर के कोनों के संग में, हर मन के अंधेरों के र�
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भंडारा और तीन दोस्त
भंडारा और तीन दोस्त ★★★★★★★★★★★★★★★★★★ *प्रस्तुतकर्ता-सपनों का सौदागर..... करण सिंह* ● तीन दोस्त भंडारे में भोजन कर रहे थे। उनमें से...
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बिना सहारे के
चलता है बिना सहारे के बस आशा की उपेक्षा करता है दे साथ तू उसका, यही आश रखता है, छूट गया साथ अब तो जमाने से चलता है बिना सहारे के/ बन्द थी
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सूना आँगन
अगर तुम आते तो ना लगता सूना आँगन अगर तुम आते तो ना लगता सूना सावन/ तुम्हारे आने से अगर लगता सूना आँगन तो बन्द दरवाजो मे, मैं छुप
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नीले पंखों वाली
सुबह आई शाम आई फूलो सी महकी खुशबू सी चेहकी/ वो लम्बी चोच वाली वो लम्बी पूच वाली मखमल सी कोमल सी नीले पंखों वाली ' चिड़िया' सुबह आई श�
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