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प्रकृति वर्णन (ऊषा ) नील गगन से उतर आयी एक परी। रत्न जड़ित अलंकृत परिधान हरी। नील नयन लोचन दृग अभिरामा। शश्य श्यामल हरित पल् read more >>
समझदार हैं वो लोग जो भूले नहीं अपने वकार को! इस दौर में आसानी से भूल जाते हैं लोग अपने किरदार को इस दुनिया कि भीड़ में हमने घाटे का सौदा ह� read more >>
भोला और सेठ किसी गांव में भोला नाम का एक लड़का रहता था। घर में वह और उसकी मां केवल दो प्राणी थे। पिता, उसके बचपन में ही चल बसे थे। भोला ग read more >>
100 गुनाहो से बचकर इक तेरी आशिकी पाई है रब की मै हूँ सुक्रगुजार, मेरे ही जेसा मेरी सेहभागी बनाई है read more >>
जब जिन्दगी के सफर से परेशान हो जाओ तो थोङा रो लेना दिल का दर्द कुछ कम हो जाएगा read more >>
खेला कल जिस माटी पर लहू से अपने उसे रोशन करने आया है। आंखो का बन मोती चमकने आया है। 'शूरवीर' है! वीरों के भांति आया है। वतन पर मर-मिटने � read more >>
जिंदगी का सफर यूं ही चलता रहता है, कभी खुशी कभी गम का मेला लगा ही रहता है, कभी उजाला कभी अंधेरा लगा ही रहता है। read more >>
ऐ मानव तुमसे विनती है मेरा मत संहार करो । इस मोक्षदायिनी मां पर बस ! इतना उपकार करो । मेरी कलकल -छलछल धारा तुमको संगीत सुनाती है । पी read more >>
कविता-मन की मार बन अभिशाप जगत में बेटी मैं छिप कर क्यों जीवन जीती किसे सुनाऊं कौन सुनेगा किससे दिल की बात कहूं मैं? read more >>
इश्क का नज़राना कवि से नही कविता से प्यार कीजिए । मैने तो कर दिया आप भी इंतजार खत्म कर , इश्क ए इज़हार कीजिए ।। रचनाकार पर नही रचना पर � read more >>
कभी वक्त था तो वक्त ना था ,डरते थे कहने से । मुस्किल में होते वो , तब डरते थे उनकी मुस्किल सहने से ।। वो रोज अदब से सुबह सर नवाते थे , क्या read more >>
लड़ते लड़ते थक सा गया हूं । शायद हार से डर गया हूं ।। मुस्करा के गम दफनाते दफनाते थक गया हूं। शायद मुस्किलो से डर गया हूं ।। चलते चल� read more >>
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