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शीर्षक (गर्मी) मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) मौसम का हाल ना पूछो गर्मी से है बहाल ना पूछो। ऎसी कूलर सब आन है फिर भी घर में बहोत तापमान ह read more >>
गर्मीयों का मोसम है पसीने से भीग मत जाना दो पल की जिन्दगी हे मुसाफिर तुम भूल मत जाना / read more >>
असली दोस्त वो नहीं जो Block कर दे असली दोस्त तो वो हे जो दु:खो में दोस्त का साथ दें / read more >>
जब तुम औरों से बोले तो तुम्हें अच्छा लगा मेरा बोलना तुम्हें इतना कड़वा लगा की अलफाज भी तुम्हारे Block शब्द में मिले / read more >>
तू मिला होता तो रिश्ता ना टूटा सा लगता तेरे ना मिलने से अपना मन Block सा लगता / read more >>
लोगो का अजीब रिश्ता है शब्द भी बोलते पर Block करने वाले/ read more >>
एक तूम ही तो वो जिसे अपना समझ के बोलना चाहा था पर तुमने तो हुमे अपने phone से ही Block कर दिया/ read more >>
पढ़ी-लिखी लड़की रोशनी घर की जिधर भी जाए घर को रोशन करती एक नहीं वो कितने घरो का मान बढ़ाएं मन में है लाखो राज वो उन्हें दबाये बँधी है व read more >>
ए जिंदगी थोड़ा धीरे धीरे चल पीछे काफी कुछ छूट गया है मुझे उसे उठाकर लाने का कुछ समय तो दे न जाने क्यों तुम इतनी तेजी के साथ मेरे हाथों से read more >>
शीर्षक जिन्दगी और मौत मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) मौत तो यूँ ही बदनाम हैं। लोग तो जिन्दगी से परेशान हैं। जिन्दगी हर रोज़ लाती एक नय read more >>
वो रातो को ख्वाबों में आने लगे है । मौहब्बत मेरी बो जताने लगे है। खुले जब आँखें तो बहते है आँसू मुझे मौहब्बत मे इतना सताने लगेहै।। read more >>
हम भले ही किसी को ध्येय की दृष्टि से देखे, उस पर विश्वास करे या ना करे हम भले ही यह कहे की ये दुनियां विश्वास के काविल नही� read more >>
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