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तू जो रूठा ,तुझे मनाऊ तो मनाऊ कैसे खुदको तेरी नजरों मे, उठाऊ तो उठाऊ कैसे गलती करने की आदत सी हो गई है ,.............. जी तुझे हर बारी, मनाने का फण्� read more >>
मैं कोशिश करता ‌हू पर हर बात बिगड़ क्यों जाती है। खुशियां मेरे जीवन में आने से पहले फिसल क्यों जाती है। मैं करना चाहता हूं सब अच्छा प� read more >>
यादों के पन्नों को फिर से एकबार खोलो कभी उन लम्हों को याद करके रोओ और मुस्कुराओ कभी।। read more >>
खड़गपुर का प्रसिद्ध पूजा माता पूजा यूं तो वहां अनेक पूजा धूमधाम और बेमिसाल होती है लेकिन इस पूजा की तो बात ही कुछ read more >>
शीर्षक (फूल) मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) फूलों ने खुशबू फैलायी। चारो तरफ ख़ुशहाली आयी। फूल लगते है सबको प्यारे। है वो सबके राजदुलार read more >>
** वर्षा ऋतु ** वर्षा की ऋतु आ गई है काली बदरी छा गई है ।। ठंडी ठंडी हवा बह रही सबके मन को लुभा रही है।। अपने पानी की बूंदों से प्यास धरा read more >>
रोहणी और अलका दो बहनें थी, दोनों बेहद ही खूबसूरत थे पर रोहणी थोड़ा साफ रंग की थी इसलिए उसे अपनी खूबसूरती पर बहुत घमंड था। दोनों बहन एक -द� read more >>
रोहणी और अलका दो बहनें थी, दोनों बेहद ही खूबसूरत थे पर रोहणी थोड़ा साफ रंग की थी इसलिए उसे अपनी खूबसूरती पर बहुत घमंड था। दोनों बहन एक -द� read more >>
दिल की कितनी पीड़ा हम अकेले ही सहते हैं दिल के कितने पृष्ठ यू ही खाली रहते हैं दिल के उन पन्नों पर कुछ शब्द अधूरे रहते हैं कुछ पर पू� read more >>
जिंदगी के सफर में रुक -रुक कर चले हम,कभी हार के बैठे ना हम, हार भी गये फिर भी चलते रहे हम, आये जिंदगी में ना जाने कितने, आंधी, तूफान ,गिरकर भ read more >>
शीर्षक (नज़र) मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) नज़रों की अपनी एक अलग ही भाषा है। एक अनकही सी अनसुलझी सी परिभाषा है। वो हमसे नज़र मिलाने से read more >>
प्रिय जनवरी ABCD यह मेरा अंतिम पत्र है जो तुम्हारे लिए अंतिम बार लिख रहा हूँ, | तुम मुझस� read more >>
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