जो पहले ही कदमो में लडखडा जाये
वो चाल ही क्या ?
जो तेज भी दौडे और मंजिल तक न पहुँचे
वो रफ्तार ही क्या ?
जो चहरा देखकर मुँह फेर ले
वो प्यार read more >>
सच्ची है, नहीं तकिया- कलाम।
गुलामी, तुझे सलाम।
कोई धर्म का, कोई कर्म का, कोई शर्म का गुलाम है।
कोई आदत का, कोई मत का, कोई हरम का गुलाम है।
क read more >>