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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
लोग सोना को संदूख में बंद कर के रखते है, लेकिन हया को मिट्टी में मिलाए हुए है।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
अब जबान की बातों का कोई यकीन नही करता शाहब,क्योंकि अब सब को प्रूफ चाहिए साबित करने के लिए।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
ये फिल्म नही है शाहब की भगवान के यहां माथा टेका और दुआ कबूल हो गई,क्योंकि यहां दुआ कबूल होते होते लोगों की जनाजा कबूल हो जाती है।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
तुम्हें किसने कहा था मोहब्बत करने तुम्हें खुद बर्बादी का शौख था,लेकिन अब बर्बादी का इल्जाम किस्मत को दे रहे हो।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
किस्मत लिखने वाले को दोस मत दो शाहब तुमने खुद अपनी जिंदगी में आग लगा रखी है।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
एक वक्त की रोटी कम खाओ लेकिन अपने औलाद को शिक्षित बनो,क्योंकि पैसे से भले ही गरीब हो लेकिन शिक्षा से अमीर रहेगा।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
मेरी उम्र देख कर मेरी पहचान मत करो शाहब क्योंकि उम्र में भले ही छोटा हूं।लेकिन सोच तेरे बाप से भी ज्यादा बड़ा रखता हूं।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
मतलब खत्म हो जाए तो लोग पहचान भी खत्म कर देते है,क्योंकि मैं पैसा नही हूं जो लोग मुझे जेब में डाल कर रखेंगे।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
सुलतान बनने की कोशिश करो शाहब तलवे चाटने बालों की दुनिया भरी पड़ी है।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
तुम मगरुर क्यों कर रहे हो शाहब तुम भी तो मौत के गुलाम हो क्योंकि गुलाम वो नही जिसे मौत नही आती।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
बारिश की बूंद की तरह बनो किसी से शिकायत न होगी,लेकिन लोग चेहरे पर मुस्कान और दिल में बद्दुआ लिए घूमते है।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
अब लोग शिकायत कम और बद्दुआ ज्यादा करने लगे है।
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