हम सोच- समझकर कुछ लिख देते हैं
माता- पिता ही नहीं बल्कि सब अच्छे लगते हैं
न कहता हूं कुछ, न बोलता हूं बोल बड़े
देखोगे तुम हमे और तालियां � read more >>
रुकी हुई सी ज़िन्दगी में अरमान बहुत है
बंजर हुई ज़मीन तो क्या, ऊपर आसमान बहुत है |
छु लूँ हर एक सितारे को, इसी कोशिश में हूँ
आजकल, चूका 4 � read more >>