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चरखा और सूत लेकर जिसने अलख जगाई थी उसके अथक प्रयासों से हमने आजादी पाई थी साबरमती के संत वो प्यारे सत्य-अहिंसा के वो पुजारी जिनकी ल� read more >>
असमंजस ये था कि मैं गतिशील हूं या मुझे किया गया है ? ये मेरी उम्र,मेरा शरीर और क्षमता को क्या बढ़ाया गया है ? कैसे कटा कठिन समय,परिस्थित read more >>
कलम या तलवार तुम्हें क्या चाहिए? कलम या तलवार, या हृदय में दहकते शोले या उपकार? कलम लिख सकती हैं- अपने अपनों का इतिहास किसी की भूख क read more >>
अंधेरी रात के बाद सुबह तय है, कठिनाइयाँ हमें मज़बूत बनाने आती हैं। हर आँधी बस राह दिखाने आती है, जो गिरते हैं, वही उठकर इतिहास रचते हैं� read more >>
पढ़ो, आगे बढ़ो, मंज़िल खुद बुलाएँगी। मेहनत की सीढ़ियों पर, कामयाबी मुस्कुराएँगी। ज्ञान का दीप जलाओ साथी, अज्ञान के अंधियारे मिटाओ। read more >>
लोग हमारे बारे में क्या सोचेंगे, ये सोच-सोचकर ही हम रुक जाते हैं। मन के सपनों को आधा छोड़, दूसरों की परछाइयों में सिमट जाते हैं। कोई क� read more >>
साथियो, आओ आज मिलकर हम प्रण करें, कि धरती माँ का मान बढ़ाएँगे, कृषि शिक्षा की ज्योति जलाकर, हर गाँव को हरियाली से सजाएँगे। किसान हमार� read more >>
मित्रों! वो सूरज से पहले उठता है, धरती माँ के माथे का पसीना बनता है। ना महलों का मालिक है, ना दौलत का आशिक है, फिर भी दुनिया का अन्नदाता � read more >>
हर दिल में है अरमान यही, सरकारी नौकरी मिले कहीं। क्योंकि वहाँ सुरक्षा है, सुकून है, भविष्य का जैसे पक्का जुनून है। पर सोचो ज़रा, कुर्स read more >>
( शिक्षक/अभिभावक सोच) बात जब जून महीने की आए, अभिभावक विद्यालय को आए। कर! इकट्ठा एक कक्षा है बनाई, शिक्षक ने नई सोच रचाई। सहसा! शिक्षक read more >>
पता नहीं कैसे परखता है मुझे मेरा ईश्वर, परीक्षा भी कठिन लेता है और हारने भी नहीं देता। मैं अक्सर कहता हूँ— "हे प्रभु! इतना बोझ क्यों दि read more >>
कलमकार हूँ लिख दूंगा औकात में रहकर बोला करिए मेरे प्रोफेशन पर जरा तुम सोंच समझकर बोला करिए पैसे का घमंड तुम्हें है गर तो पेशे का घमंड read more >>
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