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मैं कोशिश करता ‌हू पर हर बात बिगड़ क्यों जाती है। खुशियां मेरे जीवन में आने से पहले फिसल क्यों जाती है। मैं करना चाहता हूं सब अच्छा प� read more >>
खड़गपुर का प्रसिद्ध पूजा माता पूजा यूं तो वहां अनेक पूजा धूमधाम और बेमिसाल होती है लेकिन इस पूजा की तो बात ही कुछ read more >>
शीर्षक (फूल) मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) फूलों ने खुशबू फैलायी। चारो तरफ ख़ुशहाली आयी। फूल लगते है सबको प्यारे। है वो सबके राजदुलार read more >>
** वर्षा ऋतु ** वर्षा की ऋतु आ गई है काली बदरी छा गई है ।। ठंडी ठंडी हवा बह रही सबके मन को लुभा रही है।। अपने पानी की बूंदों से प्यास धरा read more >>
शीर्षक (नज़र) मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) नज़रों की अपनी एक अलग ही भाषा है। एक अनकही सी अनसुलझी सी परिभाषा है। वो हमसे नज़र मिलाने से read more >>
क्यों घमंड है तुझे ऐ माटी का शरीर मेरा-है-मेरा, कहता है कल ना जो तेरा है कुछ भी तो ना लाया था तूने कुछ लेकर भी ना जाएगा रो के आय� read more >>
जिंदगी की राह में समय के साथ जख्म मेरे भर गए अब लौटकर मेरा हाल पूछने ना आना जब जख्म के निशान भी मेरे ना रहे समय के साथ कुछ बदलाव भी जर read more >>
है नई पहचान मेरी, और नया ये जहान है! गुल से हैं रौशन गुलिस्तां, शीद्दत के पथ परवान है!! है जहां मेहफ़ुज़ ज़ो, गुलशन को सी� read more >>
कविता -करें योग रहें निरोग यदि जीवन में योग करेंगे जीवन भर निरोग रहेंगे। चिंता मन से दूर भगेगा तन सेहत मजबूत बनेगा स्वस्थ कुशल प्� read more >>
फूल और खिलता आज भी कलियाँ भी खिल खिलाती भवरें गीत सुनाते आज भी कोयलिया भी गुनगुनाती बगियाँ मुस्कुराती आज भी अगर हवा का झोका न आत� read more >>
कहा भी न जाये सहा भी न जाये तू इस कदर बसी हैं दिल में की क्या बताऊ कैसे दिखाऊ बस इतना समझ ले तुझ बिन रहा भी न जाये तू रोज रोज हर रोज � read more >>
कविता-दो घूंट चाय चाय पर बैठ कर चुस्कियां ले ले कर मीठी मीठी बातों में खो कर भूल पाता अपनी पुरानी बातें कि ताजा कर देती थी मन को चाय � read more >>
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