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पापा पढ़ने जाऊंगी
कविता -पापा पढ़ने जाऊंगी गांव में खुलल आंगनबाड़ी मैं पापा पढ़ने जाऊंगी तुम पढ़ें नही तो क्या हुआ? मैं पढ़कर तुम्हें पढ़ाऊंगी, सीख
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मां
खेल कूद कर आए शाम, बदरी हो या घाम। मां की एक झलक दिख जाए, फिर आंचल में छुप जाए। मां कि इतनी बोली प्यारी, अपने बेटे को क्षमा कर देती मां।�
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शिव
छाल पहने पिले रंग कि एक जटाधारी। तीन नयन एक कुंडल माथे चन्द्रधारी। जटा से निकलती गंगाधारी, गले सर्फ कंठ निवाला। शोभे बासहा बैल सवा�
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आओ बैठो पास मेरे तुम्हे अपनी कहानी सुनाता हूँ
आओ बैठो पास मेरे तुम्हे अपनी कहानी सुनाता हूं जो मेरे साथ हुआ बो सब आज बताता हूं बचपन गुजरा रंगीन फिजाओ में ,कुछ नमी थी उन हवाओ में इस �
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बिना संघर्ष नाम नही होता
क्यों कायरता दिखलाते हो क्यों आस लगाए बैठे हो । बिन संघर्ष नाम नही होता बिना किये समाधान नही होता। अगर मंजिल को पाना है तो खुद से खुद क
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आज कल के युवा बड़े निराले है
आज कल के युवाओं की बात बड़ी निराली है इनके मुख को देखो एक अजीब सी लाली है जो अद्यापक शिक्षा देते आज उन्हें देते ये गली है इनको पीनी फरे�
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जीवन का मंजिल
लाखों जन्मों का सफर, मेरे पास मंजिल। मानव तन ही है द्वार, हुजूर का दरबार।। अर्थ-चौरासी लाख योनि का कठिन मार्ग तय करने के बाद, परमपिता �
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कितने मासूम
कितने मासूम हो तुम किसको आए तरस ना जो भी देखे तुझे हार बैठे दिल अपना मेरे बस में नहीं है तुझको चुप कराना पर मुझसे देखा न जाए इस तरह से �
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स्वर्ग
सुबह कि हरियाली मन को मोह ले जाती है। सुरज कि किरणें उनपर पड़ती है । बिखरे फूल खिल जाते है ऐसा लगता जैसे स्वर्ग उतर आया हो।।
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तेरीऔकाद
अपनी ना देख दूसरे के करे पहचान , है क्या तेरी औकाद।। जड़ ना होवे मजबूत, पेड़ पर चढ़ जाए। डाली कट जाए , आ निचे लपका।। आसमानों का है ,सैर
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हमारा जीवन
जीवन का राज है, अरमानों का यह सांझ है। माता-पिता का काम है,इनका ही आशीर्वाद है।। लोहे जैसी हिम्मत है, लोहे जैसा जज्बा। आंखों में लिए �
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# कभी कांटा , कभी गुलाब ......
# कभी कांटा , कभी गुलाब ...... रह गई , जिंदगी अब तो कभी कांटा , कभी गुलाब ....! उलझी हुई , इस कहानी के के पात्र हैं , मैं और आप ....! रह गए , दिल में क�
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