इस भीड़ भरे बाजार में,
हर एक चीज बिक रही है।
लगाए अपना मजार कहाँ,
कोई ठौर नहीं दिख रही है।
दर्द जो दिल में था कब से,
आज आँसू बन के पिघला � read more >>
जो अपने हित के. लिये ना लड़ सका ,
वो परहित के लिए क्या लड़ेगा |
जो सबकुछ जानकर सही को सही और गलत को गलत ना कह सका,
अपनो के साथ युद्धके डर से अ read more >>