हर दिन जैसे मेरी, शाम गुजरती है,
मेरे सब्र का वो, इम्तिहान लेती है।
हर दिन मेहनत में, निकल जाता है,
परिणाम नहीं पर, कुछ आता है।
हार हार के � read more >>
हर बेरोजगार की, यही कहानी,
रोकर बीत, रही जवानी।
घरवाले भी अब, ताने देते,
हमें ही पता है, हम कैसे जीते।
सर्परूपी समाज भी, डसने को तैयार है,
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खत लिखता हूं प्रभु
तुम्हे पहली ही दफा
कर लेना ये स्वीकार
होना मुझपे ना खफा...!!
दीन बच्चा हूं मैं तेरा,
लें विनती मेरी मान,
तेरी शरण में � read more >>