ओ देश के विर पुत्रो,नव युवको
जागृक हो,सचेत रहो,भान रखो
कि भष्ट्राचार से,देश द्रोह से
देश दुबळा आज हो रहा
हम लाचार क्यो ?-2
याद करो वो क्र� read more >>
____प्राण से बढकर तिरंगा ___
हमे तिरंगा प्राण से भी बढकर है
ये हमे स्वाभिमान का रंग लगे
उचाई पे फडका जो
लहर लहर लहरता वो
खुशीका कोई आज ना ठ� read more >>
( प्रथम अंतरा )
आवारा दिल चलता,
हवा के साथ गुनगुनाता।
सुर जो बनते तेरे ही नाम,
जहां में जहां-जहां चलता....(2)
आवारा दिल चलता,
हवा के साथ गुन� read more >>
क्यों? न! प्रिय मैं तुम्हें पहचान पाई !
क्यों ?मैं दौड़ती रही उस कठिन समय में तुम संग अकेले !
क्यों ?न राह के कांटे को मैं समझ पाई ?
जो मैंने read more >>
भगवान भोलेनाथ के श्रीचरणों में, सादर साष्टांग निवेदित, स्वरचित लोकभाषायी अवधी रचना।
-----------------------------------------------------
हथवा त्रिशूल,डमरू,नन्दी पे read more >>