दुआ है-
हे पीहर की तू है राजदुलारी!
तुम्हारी यादों का-
यह मेला रह-रह के गुजरता है!
हंसी और रूठने-
मनाने का हर सिल-सिला!
तुम ही तो थी घर-
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पता नहीं क्यों दिल को यह महसूस हो रहा है कि जीवन में कुछ कमी रह गई इस कमी को पूरा करने का मैंने बहुत ही दिलों जान से प्रयास किया परंतु फिर read more >>