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क्यों झांक रहा मन मेरा? पथ में इतने कांटे थे मन में जितनी बातें सहज और सम्पूर्ण भाव से आंक रहा मन मेरा। बिजली के उर में तड़पने मानें read more >>
मुझे कहना है उन लोगों से जो रोकते हैं टोकते हैं खींचते हैं क्या मिलता है जिसे जो करना है करने दो कहने दो क्यों तकलीफ है किसी के बढ़न� read more >>
एक आश न थी टूटी एक आश बनाने आये तुम एक कुसुम खिला था मन का एक और खिलाने आए तुम। तुम हमको ढूंढ रहे हो हम हदय तुम्हारा मांग रहे हैं। जो क� read more >>
कहां निकालू इस अटल विश्वास को टूटते फूटते जो रच रहा इतिहास को। संभव है द्वंद मिट जाए न हो अवसाद इसका भेद से निकला हुआ तीर चुभ जाए हव� read more >>
छूटा बचपन छूटीं यादें छूट गई सब बुनियादे पथ छूटे पथरीली राहें आंगन की महकी दीवारें चंदा और चकोरे छूटे छूट गए सब साथी। मां छूटी पापा read more >>
वेदना के सुर मिले वेदना के गीत वेदना मय हो गई वेदना से प्रीत। वेदना में दिन हुआ वेदना में रात वेदना सफर हुआ वेदना में बात वेदना मय ह� read more >>
जाकर उसे जगाओ जो कब से सो रहा है। मेरे खिलाफ जिसका सब चूर हो रहा है। बीती रागिनी का चंद ताल होकर, जमाने की रोशनी से दूर हो रहा है। फुर्� read more >>
मेरे पथ की चाह यही है, कहते जाना,बढ़ते जाना। जहां दिखाई दे कोई अपना, रहते जाना,सहते जाना। बन्द बन्द सारी परतें, यूं ही खुलती जानी है। अ� read more >>
दूर से जिन्दगी गुनगुनाती रही , कभी पास आ मुस्कुराती रही। कब लगा तुम मिले मुझे इस डगर , चुपके चुपके ये खुशियां चुराती रही। उस विभा पार त� read more >>
खिलती है जीवन की कलियां, अनुराग भरी इस क्यारी से। कब, कौन छूट जाएं जीवन की फुलवारी से। जग में छाया है अन्धकार, जिसने रौंदा है बार बार। read more >>
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