Sudha Chaudhary 22 Jun 2023 कविताएँ समाजिक 34413 1 5 Hindi :: हिंदी
छूटा बचपन छूटीं यादें छूट गई सब बुनियादे पथ छूटे पथरीली राहें आंगन की महकी दीवारें चंदा और चकोरे छूटे छूट गए सब साथी। मां छूटी पापा छूटे छूटे तन मन की सब बातें यादों के भंवर जाल में बस न गए सब जाते जाते वही हंसी वही खुशी वही मोह माया वही खेलता है एकांत जिसमें था बचपन मेरा। सुधा चौधरी बस्ती
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