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शरद भूषण मोंगरा
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शरद भूषण मोंगरा
शरद भूषण मोंगरा
शरद भूषण मोंगरा
@ sharatha-bhashhanae-magara
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सनातन सूत्र
सनातन सूत्र वेद, पुराण नमस्कार आज से हम आपके लिए लेकर आ रहे हैं एक ऐसा कार्यक्रम जो सवयं में समेटे हुए है सम्पूर्ण सनातन संस्कृति और �
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संगीत में लिपटे शरद भूषण मोंगरा के गीत
कवि गीतकार शरद भूषण मोंगरा का संगीत सफर। म्यूजिक के संग शरद के गीत। कवि गीतकार लेखक शरद भूषण मोंगरा का योगदान हिंदी साहित्य के साथ सा
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संगीत के साथ शरद भूषण मोगरा का सफर
कवि गीतकार शरद भूषण मोंगरा का संगीत सफर। कवि गीतकार लेखक शरद भूषण मोंगरा का योगदान हिंदी साहित्य के साथ साथ दर्शन के विषय अध्यात्म प�
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मालिक की मर्जी
कलंदर यूं नहीं बनता कोई बिना मालिक की मर्जी के, कि हस्ती भूलनी होगी अगर मस्ती को पाना है। शरद भूषण मोंगरा
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गंगे मां
'गीत' "गंगे मां" गंगे मां गंगे मां गंगे मां सबको कर दिया है तूने धन्य मां गंगे मां गंगे मां गंगे मां छल छल से कल कल सी लहरें हैं शीतल स�
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पीपल वाली भूतनी
"पीपल वाली भूतनी" चाय की दुकान पर 4,5 दोस्त खड़े आपस में बात कर रहे हैं राम, श्याम,बंटी,पिंटू,गोलू राम - अरे यार कल मैं दोपहर में उस जंगल वा�
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सब कुछ बोल गई
"वह फिर भी सब कुछ बोल गई" बिन साज श्रंगार किए ही वह मनभावन तरुणी लगती थी चपल नहीं थी शांत भाव में खिली कुमुदिनी लगती थी वह कुमारी सुक�
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पानी पर खिलता कमल हो तुम
"पानी पर खिलता कमल हो तुम" पानी पर खिलता कमल हो तुम कुदरत की लिखी गज़ल हो तुम या हरी भरी प्रकृति में योवन का ताज महल हो तुम या नीले नीले
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नखरे हसीनों के।
"नखरे हसीनों के" जिधर चलते हैं ये नखरे ये नखरे बढ़ के होते हैं हँसीनो की तो नाकों पर, ये नखरे अड़ के होते हैं। ये गुस्से की निसानी है, ह�
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उसको देखा नहीं कभी है
"उसको देखा नहीं कभी है" पता नहीं वो कैसी होगी पता नहीं उसका कुछ रंग ढंग लेकिन उसने कहा है जैसा उस पर सब करता हूँ अर्पण उसको देखा नहीं क
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