शरद भूषण मोंगरा 09 May 2026 शायरी धार्मिक मालिक की मर्जी 5812 0 Hindi :: हिंदी
कलंदर यूं नहीं बनता कोई बिना मालिक की मर्जी के, कि हस्ती भूलनी होगी अगर मस्ती को पाना है। शरद भूषण मोंगरा
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