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MUSARRAT ALI

MUSARRAT ALI

MUSARRAT ALI

@ musarrat-ali
, UP

अजनबी सा घूमता जिस पहर में हूँ, तू आके देखे तुझे ढूंढ़ता, मैं तेरे शहर में हूँ।

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My Articles

नभ के राही तु सुन मुझको ले चल उस पार जहाँ उड़ के तु जाता है लेने प्यार दुलार । नभ ही है वो घर तेरा नभ ही तेरी जान नभ में ही विचरण करें न read more >>
हो गयी है शाम अब तो आरे पिया आके महफ़िल की शम्मां जला जा फिर जलाकर शमां को न जारे पिया हो गयी है शाम अब तो आरे पिया । काटने से भी राते ये read more >>
तन्हा तन्हा दिल बेकरार हो गया, तुझे सोचता रहा और प्यार हो गया । कभी-कभी तो मिलती थी निगाहें उनकी, पर ना जाने कैसे आखें चार हो गया । पलक� read more >>
मैं आबिर हूँ है मुझमें भी आतशे-जिगर, मकाम तू ही मेरा छोड़ तुझे जाउँ किधर । तेरी सीरत में एजाज़ नज़र आता है, या ख़ुदा क्या करुँ बह जाउं न� read more >>
तेरे चेहरे सा चमक कहाँ उस चाँद में है, तुझसे रोशन है ये दुनिया, और रोशन वो चाँद है । तेरे जुल्फों सा अंधेरा ना घटा कि काली रात में है, तु� read more >>
तेरे अंजुमन में कैद है मेरी हर तमन्ना मैं दिवाना तेरे गालियों का हूँ, यूँ मुसाफ़िर ना समझना । बागो में घूमता फिरता मैं बनके अफ़साना read more >>
ना बुलाना ख़ुदा हमे जन्नत मे ज़िंदगी के कुछ अरमान बाकी है जरा सांस तो लेने दो फरिश्तों हमारी अभी जान बाकी है । देखता हूँ शहर में हैं read more >>
नशीली रात में जब हमने तेरा नाम लिया जो तुम ना आए तो तन्हा था शराब थाम लिया l बस इक नज़र तुझको देखा मुझको होश नहीं मैं डूब जाऊँ निगाहों � read more >>
सोचता हूं क्या लिखूं, ना झरनों में वादें हैं ना नदियों में कोई धारा सोचता हूं क्या लिखूं ना साहिल पे कश्ती है ना समंदर में किनारा। सो read more >>
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