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Anilkumar Rathwa (Sameer)

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My Articles

श्लोक १ कारागारे जन्मो मे, माता बन्धनयुक्तया। शिशुत्वे दुःखमासाद्य, लीला आरभ्यते धरा॥१॥ भावार्थ – मेरा जन्म कारागार में हुआ। माता read more >>
ज्ञान की गंगा के वह सच्चे पुजारी, सरल हृदय, गहन विचारों के अधिकारी। सत्य, धर्म और शिक्षा के दीपक थे, विद्या-मार्ग में उजियारा भरते थे। read more >>
पढ़ना तो पड़ेगा मेरे भाई, क्योंकि किताबों में ही छुपा है सच्चा उजियारा। मेहनत की कलम से ही लिखी जाती है, हर इंसान की किस्मत का प्यारा स read more >>
जो इंसान अपने काम में व्यस्त है, वही सचमुच अपने जीवन में मस्त है। जो अपने सपनों को सच करने में लगा है, वह हर पल को जीने का असली मज़ा ले रह� read more >>
डर से जो हार मान लेता है, वो मंज़िल तक पहुँच नहीं पाता है। जो हिम्मत से कदम बढ़ाता है, वो हर बाधा को पार कर जाता है। अँधेरों से डरकर जो ठ� read more >>
શિક્ષણ વિના ઉદ્ધાર નથી, એ સત્ય અખંડ છે, જ્ઞાનના પ્રકાશ વિના જીવન અંધકારમય છે। અજ્ઞાનનો અંધકાર માણસને બાંધી રાખે, શિક્ષણ એ બંધન તોડી� read more >>
नर्मद, तुमने जगाया था, गुजरात का स्वाभिमान। "जय जय गरवी गुजरात" से, भर दिया जन-जन का प्राण। सुधारक, चिंतक, लेखक तुम, ज्ञान की ज्योति जला� read more >>
कौरव-पांडव रणभूमि में आए, धरती ने भी स्वर थरथराए। ध्वनि उठी शंख और नगाड़ों की, पर मन में आँधी थी अरमानों की। कर्ण ने देखा सामने अर्जुन read more >>
गोकुल की गलियों में बांसुरी बजाई, माखन चुराकर भी प्रेम सिखाई। गोपी-ग्वाल संग हँसी की धारा, फिर भी भीतर था विश्व का सहारा। रणभूमि में � read more >>
जन्मा था सूर्य की छाया से, पर छोड़ा गया समाज की माया से। माँ ने आँचल का दूध न पिलाया, पर राधा ने प्यार का समंदर बहाया। हर कोई कहे — "सूतप� read more >>
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