Anilkumar Rathwa (Sameer) 24 Aug 2025 कविताएँ धार्मिक "कर्ण की व्यथा" 16431 0 Hindi :: हिंदी
जन्मा था सूर्य की छाया से, पर छोड़ा गया समाज की माया से। माँ ने आँचल का दूध न पिलाया, पर राधा ने प्यार का समंदर बहाया। हर कोई कहे — "सूतपुत्र", "निचला", पर कर्ण का दिल रहा हमेशा उजला। धनुर्विद्या में अर्जुन से कम न था, पर अपमान सहना उसकी किस्मत था। दानवीर कहलाया जग में, कभी न रोका किसी को भग में। कवच-कुंडल भी दान कर दिया, शत्रु को शक्ति खुद ही दे दिया। मित्रता का जो धर्म निभाया, दुर्योधन के संग ही खड़ा दिखाई। अधर्म का साथ लिया मज़बूरी में, पर निष्ठा रही उसकी पूरी में। जब रथ धँसा, धरती थमी, रणभूमि में साँस भी थमी। निर्दय बाण जब हृदय में समाया, तब इतिहास ने उसे अमर बनाया। कर्ण सिखाता है जीवन का पाठ— अपमान सहो पर छोड़ो न साथ। दान, वीरता और वचन का मान, यही है कर्ण की अमर पहचान।