"महाकाल"
"हम खोज में निकले है,जिसके वो कहीं कैलाश की चोटी पर बैठा है, शांत,शन्यू,अमुख-सा जिसके सिर पर विराजी है,गंगा गले में लिपटा है, सर्प read more >>
हुं......,भिड लगी है ,दर पे जो तेरे - 2
तू ही सब का प्रभू l
1. दिल से मांगे जो , दर पर तेरे -2
करता है उस की मुरादे पूरी 2
हर दुखियों के दुख तू ही हर� read more >>
कविता = ( गुमान )
इस शरीर पर मत कर गुमान !
यहाँ पल दो पल का तू मेहमान !!
इस शरीर का मत बन दीवाना !
माटी में इसको मिल जाना !!
दुखियों के जो आए क� read more >>