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एक मंजर था, खुशी का मेरे दिल में। छाई थी, बहारे- फिजा महफिल में।। एक दिन बिछड़ने को, क्यों जुड़ा ये रिश्ता। एक बेगाना लगता था, अपना � read more >>
गली के गँवार आशिक दिवाने हो गए, अब हमसे क्या आपका मतलब रहेगा, हम तो दोस्त आपके पुराने हो गए।। पहले मेरी हाँ से महफिल सजा करते थे, मेरी read more >>
दर्द-ए-दिल से सूर-ए-नगमा, तुम्हारे ही नाम लिखता। मिटाता हूं जमी पर सूर बन, आते दिल के आंसू रोते हैं।। -मोती read more >>
लौट कर जा रही हूं अब जो तेरी दुनियां से खुदा से दुआ करेगें तू खुश रहे अपनी दुनियां में तुझपे न आए कभी कोई आंच बस इतनी ही चाह रहेगी मेरी � read more >>
जीने की कोशिश न कर, तुझे जीना नहीं आता है। कभी हाथों से जाम न पकड़ना, तुझे पीना नहीं आता है। ये शराबे- इश्क है, जान ले लेती है। लत ऐसी � read more >>
दिवानगी की एक हद थी, उन्हें अपना बनाने की एक मकसद थी। अपने साथ कैद परछाई से, एक बार आजाद होकर के देखो। किसी बेगाने के पीछे, एक बार बरब read more >>
कविता- मैं प्रकृति सुंदरी हूं मनोरम मनोहर, छंटा वादियों की सजी दुल्हन जैसी,प्रकृति सुंदरी हूं। सजी हूं धज read more >>
रात बीतती चली गयी, सुबह होकर भी शाम में बदल गयी। यह कैसा है मुहब्बत का फसाना, जो थी अपनी कहानी, गैर के नाम में बदल गई।। चाँद था प्यारा � read more >>
वो चोट देकर कहीं बैठा है देखो हम उफ़ भी ना किए तो वो समझे हम खुश है देखो। धन्यवाद read more >>
मेरा अच्छा होना दूसरों के लिया तो अच्छा था। पर मेरे ख़ुद के लिये अच्छा होना बड़ा महँगा पड़ा। सचिन कुमार सोनकर read more >>
फिर आई दर्द लेके होली, सारे गुलाल उड़ रहे। उनकी एक याद है कि, जो मलाल की जड़ रहे।। बेचैनियाँ रंगों की मानिंद, जीवन में एक फुहार की तर� read more >>
हर तरफ है धुँआ, अचानक एक पल में क्या हुआ? सामने आँखों के , हर मंजर बदल गए। आँखों में एक पहरा, जख्म देख जरा गहरा। दिवानों के कत्ल में स� read more >>
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