अब तो ख़ुशी के नाम पे कुछ भी नहीं रहा
आसूदगी के नाम पे कुछ भी नहीं रहा
सब लोग जी रहे हैं मशीनों के दौर में
अब आदमी के नाम पे कुछ भी नहीं रह� read more >>
...हमेशा एक प्रश्न-
की तरह जिंदा रहता हूं,,
... ख़ुद से-
ख़फ़ा हूं मैं जानता हूं,
अब कभी उत्तर नहीं मिलेगा,,
...दिल में-
रखता हूं.. आपको,
तुम्ह read more >>
क्यों छीन लिया गया उस बच्चे से उसका हक...
जिसकी काबिलियत को बिना जाने हो गया तुम्हें सक...
क्यों तोड़ दिए गए चुन-चुन कर उसके सपने..
ठेके पर � read more >>
कुछ साथ चले ऱहबर तो कुछ छूट गए ,
अरमानों के सारे बांध टूट गए ,
जिन पर विश्वास किया कि मंजिल तक साथ चलेंगे____
वही साथी मुझको रास्ते में लूट read more >>
अंधेरा मुझे फिर से बुला रहा है,
मैं उससे दूर जाना चाहता हूँ...
फिर क्यों सामने आ रहा है,
मैंने तो रोना छोड़ दिया था...
अब बड़ी मर्तबा के बाद, read more >>