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मुक़द्दर
पिछे कोई नहीं अब अपने, सिवाय अपने आप के जाम बंजर बन गया, जिंदगी मे हर रिश्ता खंजर बन गया खिलाने पिलाने वाला मुक़द्दर लिखने वाले के आगे �
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वफ़ा दार
कुर्ते तो अक़्सर कुत्ते हीं कुतरा करते हैं,, वैसे भी हम आदम जात बे फरामोश हैं,वफ़ा दार तों कुत्ते हीं कहलाते हैं ।
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सही -गलत
यहां ग़लत कों सही समझ ने मे कोई दिक्कत नहीं होगी जनाब,, वहीं सही कों सही समझ ने मे बड़ी इम्तिहानो से गुजरना होगा साहीबान।
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मिले न ऐसी जीवन
मिले न जीवन इस तरह कभी जो सोच से शुरू और चिंता पे खत्म हो, किसी को मनाने में ही सारी उम्र यूं जख्म हो, हरपल मन उदास और न आंखें यूं नम हो न
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बेबसी
ग़र मेरा प्यार है तुम्हारे गमों का कारण। मेरे अपनेपन से पहुंचता है तुम्हें असीम दुखः। मेरी ये बेबस आँखे ले आती है तुम्हारे आखों में �
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बचपन
एक बचपन था, जो खिलौनों से बीत गया...! एक मन हैं, जो अब मौन(एकांत) चाहता हैं...!!
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प्यार का शौक
वो मेरी दौलत ही थी जिसने तुझे मेरे काबिल बनाया वरना, तुझे मेरे प्यार का शौक कहां
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वक्त
तुम को प्रेम में पत्र, उपहार, और फूल मिलें होंगे...!! मैंने अपना कीमती वक्त दिया हैं तुम्हें....!! अतुल...✍🏻
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दुःख पर कविता
मानों है सावन आया आंखों से आंसू का झड़ना मानों है सावन आया दुःख के घेरे काले बादल तन मन पर ऐसे छाया नहीं उगेगा सुख का सूरज नहीं सवे�
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अवसाद
ऐसे तू सामने आया न कर... तेरे जाने पे आँखे, तुझे देखने को तरसे... ख़ुशी तो बहुत, पर आँखे नम कर जाती है... ये आँखे पूर�
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किसान महान
कविता रघुवीर सिंह पंवार धूप में तपता, धरती का लाल, हाथ में हल, आँखों में सवाल। हर बूँद पसीने की, बनती मोती, खेती करता, सजाता अपनी ओटी। �
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नसीब की शिकायत
मेरी,..... मेरे नसीब की शिकायतों से तेरा क्या वास्ता ........! तुमने तो हमें ,बहुत पसंद किया था । कभी, हम ही तेरे काबिल नहीं थे ।।
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