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कभी हार नहीं होती
खिलखिलाती चेहरे से बेहतर कुछ और नहीं होती, मेहनत करनी वालों की कभी हार नहीं होती।
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मंजिल
रास्ते तो लोग बता सकते है लेकिन मंजिल तुम्हे खुद की मेहनत और जुनून से ही मिलेगी.....
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क्या जरूरी है
क्या जरूरी है आज के जमाने में क्या जरूरी है किसकी सुना जाए खुद की या दुनिया वालो की खुद की करू तो दुनियां धिक्कारे और दुनियां की सूनू
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जिक्र गमों का
जिक्र जब गमों का हो तो अपने लबों को खामोश रखना, क्यूंकि यहां लोग मदद कम तमाशा ज्यादा करते हैं.........
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ये मेरा हक है
बड़े प्यार से, मां के गोद में, बैठे बैठे पूछा गीले बिस्तर पर क्यों सोती मुझे सुलाती सूखा तीखा तीखा लात मरता तुझको लगता मीठा खाना खाती म
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व्यापार
कहीं थम गई सांसे कहीं कोई बर्बाद हुआ कहीं जीवन पूरा ठहर गया कहीं कोई आबाद हुआ !! कहीं मांग का सिंदूर मिटा कहीं आँखो का टूटा तारा कहीं �
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जिस्म थे,नुमाइश थी,दिखावट थी सब ओर
जिस्म थे नुमाइश थी दिखावट थी सब ओर असल चीज गायब थी बनावट थी सब और खानदान ही खानदान के खून का प्यासा था रोजी रोटी के झगड़े थे अदावत थी स�
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कविता, घर जा रहे प्रवासी।
घर जा रहे प्रवासी। कितने भुखे और प्यासे। इतना पैदल चल रहे हो। की पाँव में पड़ गये छाले। वेग और झोला हाथ मे। छोटे बच्चों को लेकर माँ।
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जैसी करनी वैसी भरनी
किसी को रुला कर भला कैसे खुश रह पाओगे हकीकत यही है जैसा बोओगे वैसा ही पाओगे
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मनुष्य एक है
🌺 मनुष्य एक है🌼 ब्राह्मण हो या शुद्र जन्म तुम्हारा एक है अच्छे कर्म कर मिलने वाला तुझे स्वर्ग है चंदन हो या कोई सामान्य वृक्ष की लकड�
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इंसानों के खूंखार चेहरों से डरते हैं अब
इंसानों के खूंखार चेहरों से डरते हैं अब जमीन पे फरिश्ते भी कम उतरते हैं अब उखड़ी सड़कों पर कभी निकलकर देखो कुत्ते बिल्ली की तरह लोग म
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rooh kabj kro,hatheli par jan ko utaro
रूह कब्ज करो,हथेली पे जान को उतारो रू ए जमीं पर कभी आसमान को उतारो हम अर्जी देकर थक चुके हैं अब तो कभी नक्शे कागज पर हमारे मकान को उतार�
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