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जिंदगी की इस सफर में कोन अपना है , कोन पराया है ,कभी अपनो ने ही धोखा दिया तो कभी गेरो ने अपनाया है ,रिश्तो का न कोई मोल है ,सब पैसों का ही बो� read more >>
मैंने, समय को करवट बदलते देखा। औलाद से हारते देखा, दुनिया जीतने वाले को। जटाओं पर जीते देखा, भारी- भरकम तने वाले को। रिश्ते रास्ते बदल � read more >>
बहुत अच्छा नहीं होता इच्छओं का बढ़ा होना जब ये बढ़ती हैं तो विनाशा का कारण बनती हैं | आज का मानव दास है अपनी बढ़ती read more >>
यह ज़िंदगी, एक क्रिकेट है। आदमी एक खिलाड़ी है। कितना ही अच्छा खेलो, हारता जो क़िस्मत आड़ी है। जीवन पिच् पर चलती, जाती समय की गाड़ी है। read more >>
कभी तो जिंदगी को बेपनाह मोहब्बत दिया जाए लगी है आग शहर के किस हिस्से में यह क्यों पता किया जाए बहुत पहले से जुदा है बेपनाह प्यार क read more >>
कविता-अंतरिक्ष आओ मन के अंतरिक्ष में शैर कर लें। चांद का शीतल प्रभा चित् में पिरोए आज हम शांत कर चित् चेतना ज� read more >>
तुम देते हो गाली तुर्कों को लेकिन जिक्र तक नही करते अंग्रेजों का,अपनी किताबों मे और तो और तुम्हारी वाट्सएप युनिवर्सिटी मे मुगलों की read more >>
यौवन युक्त विभावरी, श्रृंगार करे रजनी रानी। जूड़ा खोले, केश सुखाए, छिड़क गया अमृतपानी। अल्हड़ बूंद नादान- सी, धरती पहुंच इतराती। चमचम read more >>
जाज्वल्यमान मणि, चमचम चमक रही है। दृष्टिवंत क़िस्म, मणिमय दमक रही है। तीक्ष्ण रश्मि अंतरायण, वहीं सिमट रही है। रश्मि से रश्मि, बेमन ल� read more >>
तपिश शब्द गर्मी की पराकाष्ठा को हमारे मानस पटल पर चित्रित करने के लिए पर्याप्त है। भारतवर्ष में तपिश अप्रैल से जुलाई तक अपने उग्र रूप read more >>
शीर्षक जिन्दगी और मौत मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) मौत तो यूँ ही बदनाम हैं। लोग तो जिन्दगी से परेशान हैं। जिन्दगी हर रोज़ लाती एक नय read more >>
हम भले ही किसी को ध्येय की दृष्टि से देखे, उस पर विश्वास करे या ना करे हम भले ही यह कहे की ये दुनियां विश्वास के काविल नही� read more >>
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