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11 जुलाई 2025 के समाचार पत्रों में एक ही तरह के दो ऐसे समाचार प्रकाशित हुए जो अंदर तक झकझोर गए। हिसार के एक विद्यालय के संस्था प्रधान की उन read more >>
पंडित रघुनाथ मुर्मू, आदिवासी समाज लगी लहा तड़म के ते नित नोई झारखण्ड/से पूरा भारत डिसोम रे ऑल चिकी लिपि ते ओलो पढ़ा काना ले। ऑल चिकी लि� read more >>
राजू एक होशियार और मेहनती लड़का था। गाँव के स्कूल में वह हमेशा अव्वल आता, माँ-बाप का सपना था कि वह बड़ा आदमी बने। लेकिन जब वह शहर की पढ़ा� read more >>
अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या अमीर लोग ज़्यादा खुश होते हैं? क्या जिनके पास बहुत पैसा होता है, वे जीवन में सच्चे रूप से सं read more >>
ज़रूर Afsana, यहाँ एक भावनात्मक, --- "क्यों भरा है आज के इंसान के दिल में इतना ज़हर?" एक आईना समाज के लिए कभी-कभी सोचता हूँ — क्या इंसान वा� read more >>
रात के साढ़े ग्यारह बजे थे। शहर की सड़कें खाली था और दिलों की भीड़ सबसे ज़्यादा था। उसी वीराने में एक सन्नाटा धीरे-धीरे एक पुल की तरफ़ ख read more >>
आत्मसमर्पण समुद्र न होता तो! मिट जाती - मटकती मचलती थिरकती चंचल नदियों का आस्तित्व, बन जाती - विनाशक घातक तोड़कर किनारों की सीमा read more >>
तुम अकेले नहीं हो, तुम्हारे साथ है पूरा ब्रह्मांड। जो कर रहे हो, वो करते रहो, अपने दिल की आवाज़ को कभी नजरअंदाज मत करो। जो हो रहा है, हो� read more >>
मोबाइल फोन: सुविधा, संबंध और सतर्कता का युग आज के समय में अगर कोई चीज़ इंसानी जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है, तो वह है मोबाइल फोन। सुब� read more >>
क्यों समझते हो हमें सिर्फ़ औज़ार, क्या संविदा का मतलब है लाचार? जिस बिजली से जगमग है ये शहर, उसी रौशनी के पीछे है हमारा ज़हर। हमने जोड� read more >>
--- “वक़्त” — ये शब्द जितना छोटा है, इसका महत्व उतना ही बड़ा। हम सब कहते हैं, "वक़्त बहुत कीमती है", लेकिन क्या हम वाकई इसे महसूस करते हैं? read more >>
आज की बढ़ती महंगाई: एक आम आदमी की चुप्पी और संघर्ष महंगाई — ये शब्द अब किसी अख़बार की हेडलाइन या बजट भाषण की गूंज भर नहीं रहा, बल्कि हर र read more >>
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