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वक्त की मार ने होशियार कर दिया।
वक्त की मार ने होशियार कर दिया। इंसान था बेकार तैयार कर दिया। तूफान में भी लौ को जलाए रखें। यूं ही दीपक को बरकरार कर दिया। खौफ नही
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तमन्ना जवां
मूँह छुपा कर गया है अँधेरा, मेरे दिल ने जो माँगा मिल गया, मैंने जो कुछ भी चाहा मिल गया। हो गई प्यार की हर तमन्ना- तमन्न
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फूलों में होगा मेरा आशियाँ
मूँह छुपा कर गया है अँधेरा, मेरे दिल ने जो माँगा मिल गया, मैंने जो कुछ भी चाहा मिल गया। हो गई प्यार की हर तमन्ना- तमन्न
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विकास
सर्व मंगल मांगल्ए आदिपुराण, कुंठित निकृष्ट परेशान। मानसिकता विचलित होती, संगम विचारों में नव जावक नौजवान। जब आदिमानव रह�
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रूप भवन
सुनयन सुकाकुल नगर रूप भवन, चारों और व्याप्त सनसनाती खामोशी। वन-वनिकाएं वृंद वृंदनाएं वृंदावन, साबरमती के झूले फूल उपवन।
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कुदरती कीर्ति वैभव माहिती
कुदरती कीर्ति वैभव माहिती, नाना प्रकार रूपी शोभित संपदा। जगत नाथ धाम से अंबरनाथ तक, पहुंचे भक्तों की अपार भीड़। लो�
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इल्म ना थी तुझे
तुझ सा नादान कोई सारे जमाने में नहीं इल्म ना थी तुझे, ना ही कोई अंतर्ज्ञान। तूं समझता रहा बहुत कुछ, पर थी हकिकत कुछ भी नहीं। जब मैं ने ग�
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चेहरों पर चेहरें
अरे इस जमाने का क्या कहना? चेहरों पर चेहरें हैं, सच्चाई अभी भी घोड़ अंधेरे में ही है। अजब तेरी फितरत, गजब तेरी रहनुमा है। बोलना कुछ है,
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तुझ सा नादान कोई सारे जमाने में नहीं,
तुझ सा नादान कोई सारे जमाने में नहीं, इल्म ना थी तुझे, ना ही कोई अंतर्ज्ञान। तूं समझता रहा बहुत कुछ, पर थी हकिकत कुछ भी नहीं। जब मैं ने ग
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संवेदना प्रकट
आज व्यक्ति और समाज दु:ख के घनघोर अंधेरों में है । कहीं दु:ष्कर्म है तो कहीं लूटपाट है । कहीं हिंसा है तो कहीं मान _अपमान है । कहीं जात _ प
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दर्द छुपाती बहुत हो
जिंदगी की इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में , हम बहुत दूर निकल आए हैं , कुछ रिश्तो को निभाते ,निभाते, मैं थक चुकी हूं शायद मैंने इन रिश्तो को, स
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तुम्हें अपने गम से कब फुर्सत
तुम्हें अपनी जिम्मेदारियों से! कब फुर्सत मुझे अपनी जिंदगी की परेशानियां ,एवं गम ,से कब फुर्सत कभी सोचते मिलने जाऊं , तुम्हें ,फिर सो
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