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मां से ही ज्योति-करो प्रेम की वृष्टि
माँ तेरे उपकार से, जीवन में है प्यार। महिमा तेरी खूब है,जाने सब संसार।। माँ तेरे उपकार से,ज्योति युक्त है सृष्टि। रहे धरा गुलजार नित,�
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दुनिया विराजमान मां तेरे उपकार से
माँ तेरे उपकार से, जीवन में है प्यार। महिमा तेरी खूब है,जाने सब संसार।। माँ तेरे उपकार से,ज्योति युक्त है सृष्टि। रहे धरा गुलजार नित,�
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पुष्प भरे हैं प्यार-निभा रही किरदार
चिड़िया बैठी डाल पर, पवन बहे हैं मस्त। सभी जीव आनंद में,सबका दुख है अस्त।। चड़िया बैठी डाल पर, पुष्प भरे हैं प्यार। नव चाहत मन में लिए,�
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झाँझर मेरा दिल हुआ-संकट सब ही पार
भोली सूरत देखकर,मचल गया मैं यार। झाँझर मेरा दिल हुआ,संकट सब ही पार।। भोली सूरत देखकर,अंजुमन में हर्ष। निकला जो उदगार तब,हुए सभी आकर्ष
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जीवन सरगम सा रहे,मिले दिव्य पहचान
मानवता का मोल है,कहे उसे इंसान। जीवन सरगम सा रहे,मिले दिव्य पहचान।। मानवता का मोल है, यही जगत आधार। रौनक मय जन जन लगे,रहे सरस व्यवहार।�
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लगा रखें हैं खोल-कितने घातक हो गए
दुविधा में रहते सभी, करते रहते मोल। कितने घातक हो गए,लगा रखें हैं खोल।। लगा रखें हैं खोल,बने फिरते हैं नेता। करते हैं गुमराह,भाग लोगों
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रंग बदलती जिन्दगी-फिर भी बहुत ही हर्ष देती है ज़िंदगी
रंग बदलती पल _पल खूब है ज़िंदगी, फिर भी बहुत ही हर्ष देती है ज़िंदगी। चाहत दिल में सैकड़ों जवां हुए हैं, खुदा जरा साथ दें दगा ने दें ज़ि
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जीवन एक चक्र समान ही है
जीवन एक चक्र समान ही है, सतत यह प्रक्रिया जारी रहता है। जन्म_मृत्यु का का खेल, निरन्तर जारी रहता है। यहां सब एक _दूसरे पर आश्रित हैं, �
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असली साथी वही हैं-सुख दुख में वह साथ हो
सच्चे साथी आपके, देते हरदम साथ। खुशियों को बांटें सदा, रहे मजबूत हाथ।। सच्चे साथी आपके, खुशियों का दे जाम। सुख दुख में वह साथ हो,आते रह
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जीवन के मूल आधार तो परिवार ही हैं
जीवन के मूल आधार तो परिवार ही हैं दुनिया का दर्शन तो परिवार ही दिलाते हैं। परिवार से ही समाज हैं, समाज से ही देश हैं। ज्ञान की प्रथम �
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प्रदूषण एक गम्भीर समस्या
प्रदूषण ही प्रदूषण बढ़ रहा है, जिन्दगी खतरे में अब पड़ गई है। प्रकृति के साथ हो रहें खेलवाड़ है, भौतिक सुख के चक्कर में पड़े सभी हैं।
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वक्त के साथ ये वक्त बदल जायेंगे
माना अभी हालात थोड़े बिगड़े है कुछ वक्त लगेगा सब सम्भल जायेंगे मेरे वक्त को देखकर मत इतराओ तुम वक्त के साथ ये वक्त बदल जायेंगे बेशक �
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