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आत्मबोध
अपनों में ही गिराने की आज़माइश है, यह जानकर सँभलना चाहिए था। भाग कर आया है जहाँ से, उसे तो ठहर जाना चाहिए था। राह में हौसला-शिकन हों
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“मैं इंसान हूँ, कोई ख़बर नहीं”
मैं इंसान हूँ, कोई ख़बर नहीं, जो रोज़ बहे और चैनल बने। मेरी ख़ामोशी की चीख़ें भी, भीड़ में जाकर पोस्टर बने। मैं रोटी नहीं, मैं सपना हूँ,
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आज के समय में डिप्रेशन
क्या कारण है कि आज के समय में अधिकांश व्यक्ति डिप्रेशन में है? लोग सामान्य जीवन क्यूँ नहीं जी रहे हैं? डिप्रेशन से सबसे अधिक प्रभावित क
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क्या हो गए
सांसों के अरमान जगे तो, लेना भूल गए। आंखों के अरमान जगे तो, आंसू बह गए । दिल के अरमान जगे तो, पत्थर बन गए । रूह के अरमान जगे तो, शरीर छोड़ �
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“पिता का साया”
पिता का हाथ कंधे पर हो, तो हालात डराया नहीं करते। आँखों में अगर उनका भरोसा हो, तो तूफ़ान रास्ता बदल लिया करते। दुनिया झुकाने आए तो आने
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I choose to stay a student
“Life keeps teaching me, and I choose to stay a student.” ~ Prince
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एक सवाल
कल रात एक ख्वाब आया, उसमें एक सवाल आया, की क्या यहीं दुनिया का अंत है ? इंसान बना विनाशी संत है। की क्या यहीं पृथ्वी का अंत है ? एक शर�
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ख्वाब_के_पार_हक़ीक़त भाग 3
ख्वाब के पार : हक़ीक़त (भाग – 3) आज रविवार का दिन था, फिर भी आदि आज जल्दी उठ गया। उसे स्कूल नहीं जाना था, लेकिन वह रोज़ की तरह तैयार हुआ�
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हसरतें अधूरी रही
हसरतें अधूरी रह गई, जिंदगी की दौड़ भाग में। यूं ही उम्र गुजर गई, सही मौके की तलाश में।। - मोहम्मद सईद आलम
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“घर से हौसला”
मिट्टी का चूल्हा कहता है— बेटा, रोज़ जलना पड़ेगा, तभी घर में उजाला आएगा। रोटी बोलती है— पहले खुद पकना सीख, फिर दुनिया को भूख मिटाने क
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ज्ञान का दीप यदि न जलेगा
जिंदगी में रहेगा अंधेरा ज्ञान का दीप यदि न जलेगा न मिटेगी गरीबी मुसीबत हर कोई जब तलक न पढ़ेगा, जिंदगी में रहेगा अंध�
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धुणी
बरसती ठंडी धुंध में आग री ओट, मिनख रो सहारो हुवै। बुढ़िया सिंझ्या खेत सूं आई पाछै, पाळै मांय रोज तपै। बैठक जमती जोरगी चिलम री सट्ट में
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