कभी कभी लगता है की अपनी किस्मत दो रुपए की उस लिखो फिको पेन की तरह हो गई है
जब तक स्याही है तब तक उस पेन का वजूद है , स्याही खत्म पेन का वजू� read more >>
तेरी याद......1
तेरी यादों का वनवास हो गया हूँ..
न जाने तुम्हारे प्यार की लंका पर कब विजयी होऊंगा...
और शबरी का इंतज़ार हो गया हूँ..
न जाने म read more >>