बहुत कुछ कहा
उस सिमटे लफ्ज़ ने,
जैसे सिलबट्टे आ गई हो सोच पर,
धीरे धीरे उम्र ढलती गई,
जाने कैसे फिर भी वही बात चलती हुई,
खामोश बातो को फि� read more >>
----: मोहब्बत का आशियाना :---------
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तुम बिन प्रीतम आती , मुझे कहीं नींद नहीं
रात को जागू दिन को जागू, जागू दिन और रात
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