मोहब्ब निगाहों से पढ़ी जाती है,
जरूरी नही 'जिक्र-ए-अल्फ़ाज' हो.!
हुनर होगी तो ये जान जाओगे,
किस हद तक 'दिल-ए-ख़ास' हो..!!
✒️मनीष सिंह 'क्षत्रिय read more >>
मुखड़ा- कटत नईखे दिन नाही कटा तारे रात हो,
टाफी से कईले रहे प्यार शुरुआत हो,
मगले रही नम्बर नाही पुछले रही जात हो,
टाफी से कईले रहे प्यार � read more >>
मै तेरे प्यार में पागल तो नही ।
मै तेरे दिल के जमीदार तो नहीं ।।
एक बार चांस देकर तो देख,।
एक बार पलट करके तो देख,।।
मै आपको बताऊं कैसे आप read more >>
#कविता
".....बेवफा की याद में "
एक कांटा था ,
चूभ गया , दर्द दिया
मोहब्बत की राह में...
आज भी मेरा मन ,
रो उठता है एक
बेवफा की याद में...
तन� read more >>
मुखड़ा- दर्द दिलवा में जब जब उठी सनम,
रातियों के ना आखिया सुती सनम,
जाके हमरा से दूर रहबु रुठी सनम,
रातियों के ना आखिया सुती सनम
अन्तरा-1 � read more >>
दिल में इस तरह तिरी याद आई
सूने सहरा में गोया बहार आई
कागज़ पे बयां कैसे करूँ ग़म-ए-हिज्र
मिरी कलम में नहीं है इतनी रोशनई
— त्रिशिका श read more >>