वो वक़्त ही कुछ और था
जब हम तुम्हारे साथ थें
हसरत थी कितनी ....!!
तुमसे मिलकर
तुम्हें गले लगाने की
पर देखो ना
सबकुछ बदल गया....?✍️
धन्यवा� read more >>
" सच और झूठ " के दिवार में मैं आज फिर से उलझ गयी,
वो दोनों गलत नहीं शायद आज मैं ही गलत बन गयी..
कहते है कि सांप ने कांटा तो सवाल नहीं करते,
आज read more >>
*"वक़्त की स्याही में लिपटी ज़िंदगी"*
किसी ने आज हंसकर पूछा, "कौन है वो.?"
हम भी मुस्कुराए, मगर जवाब यूँ दिया—
"किसी के कानों की बाली में जड़� read more >>
नील गगन के नीचे, जलधारा के बीच,
एक नाव चली, बहती रीतम - रीत।
नाव की देहरी पर बैठी कोई,
मानो स्वप्नों से आई जलपरी।
नयनों में गहराई, लहरों-� read more >>