Pradeep Kumar Maurya 25 Jun 2023 कविताएँ बाल-साहित्य 33343 0 Hindi :: हिंदी
शीतल झरना है यह जो सरसराता है, पवन के संग नदी में मिल जाता है। पहाड़ों से उठकर बर्फों में पिघलता, जीवन के संग खुद खुद को भिगोता है। गगन से उत्पन्न होकर स्वच्छ बरसता, खुशबू लेकर अपने आप को बदलता। चमकते सूर्य की किरणों से प्रकाशित, जीवन की धारा जग में बह जाता है। चटकने से लगता है संसार नवीन, प्रगटित करता है बंदिशों का सीमन। मन को सुख और शांति से भर देता, रोगों की धारा को मिटा जाता है। बचपन की यादें जो झरती हैं इसमें, खेल-खेल में भाग लेती हैं यह वहिन। मन को भर देती है खुशियों के संग, विपत्तियों से रक्षा करती जाता है। सादगी से जो बहती है इस झरने से, मन को शांति और सुकून मिलता है। प्रकृति का सौंदर्य जो प्रगटित करती, जीवन को नयी उमंगों से भरता है। झरने की स्वर सुनकर आत्मा मंत्रमुग्ध हो जाती, स्वर्गीय संगीत का अनुभव हो जाता। मन को शुद्ध कर विचारों को उज ागर करता, उद्यम, संयम और समर्पण बढ़ाता है। झरने की स्वर है प्रकृति की मोहिनी, आत्मा को प्रशांति और आनंद देने वाली। हर यात्री को यहां आनंद से भर देने वाली, झरने की स्वर अनन्त शक्ति का प्रतिपादक है।