मोती लाल साहु 27 May 2023 शायरी समाजिक अकेले चलने की क़ुव्वत है जिसमें, चलते सफ़र में कई हमसफ़र मिलेंगे मेहरबानियां होंगी क़ाफिला बनेंगे क़बीला भी होंगे सजेंगी की बारात वक्त सिर पर सेहरा सजाएंगे। 24100 0 Hindi :: हिंदी
चलते सफ़र में- काई हमसफ़र मिलेंगे,, मेहरबानियां- होगीं क़ाफिला बनेंगे,, क़बीला- भी होंगे सजेंगी बारात, वक्त सिर पर सेहरा सजाएंगे...!!! -मोती