Mukesh Namdev 22 Aug 2023 शायरी समाजिक सिक्कों की खनखनाहट,जिम्मेदारियाँ 39403 0 Hindi :: हिंदी
"सिक्कों की खनखनाहट"
"निकल आया हूँ,बहुत-सी जिम्मेदारियाँ छोड़ के,माँ का ख्याल,पिता की चिंता, बेटे जैसे छोटे भाई को छोड़ के,जिम्मेदारियाँ के तले बस चंद सिक्कों की खनखनाहट के लिये"
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