Madhur garg 29 Jun 2023 शायरी हास्य-व्यंग यादगार लम्हे 19486 0 Hindi :: हिंदी
उन दिनों जब हम पढ़ते थे बस पढ़ाई ही करनी होती थी कभी खेलते कभी मुस्कुराते थे हमे लड़ाई भी करनी होती थी दाखिले चल रहे थे हम दिखते ठीक ठाक थे वो आई और पास में बैठ गई हमारे दिल की घंटी बज गई तुरंत अपना परिचय दिया उसका मोबाइल नंबर लिया कहा कुछ सहायता चाइए तो कॉल करना चाहता हूं तूम्हे घर से हर रोज पिक करना एक दिन किसी सवाल पर अटक गई गणित में इधर उधर भटक गई तब मैंने उसे समझाया वो समझ गई पर जाते जाते कांधे पर हाथ रख गई शरीर में करंट सा मच गया वो दिन यादगार बन गया आज जब वो बस एक याद बन गई खबर आई की वो किसी की माई बन गई