Mukesh Namdev 18 Nov 2024 शायरी प्यार-महोब्बत निगाह,ज़िस्म,इजाज़त,सिरहन 19759 0 Hindi :: हिंदी
"निगाह"✍️
"मैं ने देखा है,उसके ज़िस्म के हर एक कोने को,जहाँ तक उसकी निगाहों ने इजाज़त दी,मगर मेरी निगाहों ने उसको वहां तक देखा जहाँ तक मेरी निगाहों की पहुंच थी,
"मैंने देखा है,उसके ज़िस्म उबरे हुये तिलों को,
मैंने देखा है,उसके जाघों की सिरहन को,
मैंने महसूस किया है,उसकी गर्म साँसों को,
मैंने देखा है,उसके ज़िस्म की थिरकन को,
मैंने देखा है,उसकी निगाहों में हवस के शैतान को,
मैंने महसूस किया है,उसके ज़िस्म की गर्माहट को,उसके ज़िस्म से पिछलते हुये पसीने से,
अब और क्या बताऊँ तुम्हें क्या-क्या देखा,जो कुछ भी देखा सिर्फ मेरी निगाहों ने देखा"
#Mukesh Namdev🌸